आलू की वैज्ञानिक खेती

आलू की वैज्ञानिक खेती

आलू  किसी  भी  अच्छी  सिचित  मिट्टी  मे उगाया  जा सकता है  क्योंकि  ये  जमीन  के  नीचे  उगते  है  और  ढीली  मिट्टी  मे उन्हे  फैलने  मे आसानी  होती  है  मगर  उन्हे  गीली  बिल्कुल  भी  पसंद  नही है  क्योंकि  उसे  हवा का प्रवाह  अच्छे  से  नही  होती है  जिससे  उन्हे  तत्व  सोखने  मे परेशानी  होती है

जमीन  की बुआई  –

जमीन की तैयारी के लिए सबसे पहले उसकी दो से तीन बार गुड़ आई करके छोड़ देना चाहिए उसके बाद जमीन की खुदाई हल्की हाथों से करनी चाहिए |

कटाई व रख -रखाव –

आलू की फसल 10 हफ्ते मे हो जाती है आलू की कटाई किसी सूखे मिल करनी चाहिए खुदाई हल्की हाथों से करनी चाहिए ताकि पौधो को नुकसान ना हो सकी लगभग सारे आलू पौधों की सूखने के पहले कटाई कर लेनी चाहिए वरना पौधे सड़ जाते है| आलू पर से सारी मिट्टी साडा देनी चाहिए उसके बाद  उन्हे  ठण्डी और  सूखी  जगह  रखा  जाना चाहिए  आलू  को  कभी भी  सेब के साथ  नही  बोना  चाहिए  क्योंकि  उनसे  निकलने  वाली इथाइलिन गैस  से आलू  सड़क जाते है  आलू  घर  मे  उगाए हो या बहर से खरीदे गए  हो तब तक धोए जब तक  आप  उसका उपयोग  न करे  हो क्योंकि धोने से उनकी उम्र कम हो जाती है आमतौर पर आलू को कतार में उगाया जाता है आलू की बीज को 15 इंच के अंतराल पर लगाया जाता है और हर कतार के बीच का फर्क ढाई  से तीन फिट के बीच का होता है यदि स्थान कम हो तो एक टीला बनाकर आलू के पौधे उगाए जा सकते हैं तीन से चार फुट  की व्यास  वाले टीले पर 6 से 8 आलू के पौधे  उगाये जा सकते है  पौधे लगाने  से पहले  मिट्टी  की गुड़ाई  अच्छे  से  कर लेनी चाहिए और खरपतवारो के  साथ  पत्थरो  को  बिन लेना  चाहिए  ताकि  मिट्टी  ढीली  हो  जाए और पौधो को उगाने  मे आसानी  होती है  पौधो  को खाद डालने  से  पौधे  दागदार  हो  जाते है |

आलू  की खेती  और  नवविचार-

भारत  की  सरकारी नीतिया कही  भौतिक  और  सामाजिक  आर्थिक   स्थितियो से  काफी  भिन्न  होती है  ऐसे  मे इसे  समाधान  को आपने से हमारी  कृषि  के लिए  किऐ जाने वाले  नवीन अविष्कारो  पभावित  होते है  ये समाधान  लोगो और यहा की  भौतिक  और सामाजिक  आर्थिक स्थितियों के लिए पासिंगक नही होत है इसकी परिणाम स्वरुप नया करने का उत्साह नष्ट होता है और निर्भरता की भावना पैदा कर रहा है हाला की आवश्यकता आविष्कार की जननी है या एक प्रसिद्ध कहावत है लेकिन आसानी से आविष्कार शब्द नवीन विचार के द्वारा बदला जा सकता है आज देश घर में नवीन आविष्कार खुद के दौरान अनुभव के जा रही समस्याओं का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं यह वास्तविक जीवन रूपी अनुसंधान प्रयोगशाला में काम करते हैं और व्यवहारिक स्थितियों में जो समस्या होती है उनका समाधान खोजने की कोशिश करते हैं जैसे मिट्टी के बर्तन में संगृहीत  आलू बेहतर है गामीण  भागो और  वहा के लोगो के साथ  बातचीत  करने से पता चलता है की वहा के लोगो ने पिछले कुछ बरसो में विभिन्न नई विचार का जन्म हुआ ऐसे लोग है जो ज्यादा मुख्यधारा की बाजार को प्रभावित नहीं कर रहे हैं और किंतु ना विचार की खोज जारी रखनी की कोशिश कर रहे हैं |

आलू की बुवाई-

यदि आलू की बुवाई उचित समय पर ना की जाए तो उसकी पैदावार सही से नहीं हो पाती है आलू की बुवाई ऐसे समय में करनी चाहिए जब तक तापमान अधिकतम 30 से 32 डिग्री हो और न्यूनतम 18 से 20 डिग्री हो भारत का क्षेत्र विस्तृत है जिसकी वजह से विभिन्न भिन्न  स्थानों का तापमान भिन्न-भिन्न होता है |

मिट्टी भरना-

फसल  की निराई के  बाद  टैकटर  की  सहायता से या स्वयं ही मिट्टी  भरने  का तापमान  पूरी  करनी चाहिए |

आलू की सिंचाई-

आलू की पौध रोपण के तुरंत बाद दो से तीन दिनों के बाद मिट्टी की नमी निर्भर हुई)  रोशनी और सिंचाई का प्रतिउत्तर देना शुरु कर देते हैं मि ती की  संरचना और तापमान के अनुसार आमतौर पर 3 से 5 सिंचाई काफी होता है जरूरत से अधिक सिंचाई नहीं करनी चाहिए वरना आउट गू को नुकसान पहुंच सकता है |